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महामृत्युंजय मंत्र की रचना B232

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महामृत्युंजय मंत्र की रचना कैसे हुई किसने की महामृत्युंजय मंत्र की रचना और जाने इसकी शक्ति; शिवजी के अनन्य भक्त मृकण्ड ऋषि संतानहीन होने के कारण दुखी थे। विधाता ने उन्हें संतान योग नहीं दिया था। मृकण्ड ने सोचा कि महादेव संसार के सारे विधान बदल सकते हैं। इस कारण क्यों न भोलेनाथ को प्रसन्नकर यह विधान बदलवाया जाए। मृकण्ड ने घोर तप किया। भोलेनाथ मृकण्ड के तप का कारण जानते थे इसलिए उन्होंने शीघ्र दर्शन न दिया लेकिन भक्त की भक्ति के आगे भोले झुक ही जाते हैं। महादेव प्रसन्न हुए। उन्होंने ऋषि को कहा कि मैं विधान को बदलकर तुम्हें पुत्र का वरदान दे रहा हूं लेकिन इस वरदान के साथ हर्ष के साथ विषाद भी होगा। भोलेनाथ के वरदान से मृकण्ड को पुत्र हुआ जिसका नाम मार्कण्डेय पड़ा।ज्योतिषियों ने मृकण्ड को बताया कि यह विलक्ष्ण बालक अल्पायु है। इसकी आयु केवल 12 वर्ष है। ऋषि का हर्ष विषाद में बदल गया। मृकण्ड ने अपनी पत्नी को आश्वस्त किया-जिस ईश्वर की कृपा से संतान हुई है, वही भोले इसकी रक्षा करेंगे।भाग्य को बदल देना उनके लिए सरल कार्य है। मार्कण्डेय बड़े होने लगे तो पिता ने उन्हें शिवमंत्र की दीक्षा दी। मार्कण...

Interview with Prem B231

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 25 December 2025 को ❤️ दिल की बात में आ रहे हैं- प्रेमसिंह फर्स्वाण नाम ही काफी है सरल, सौम्य, शांत, सबकी सहायता करने वाले आज सीनियर कैमरामैन ए बी पी न्यूज़ लखनऊ में कार्यरत ३० वर्षों के अनुभव के साथ बाढ़, आपदा किसी बड़ी घटना को अपने कैमरे में कैद करने के लिए अपने कंधे पर कैमरा रखकर तेज बारिश, कड़क तपती धूप, कड़ाके की ठंड कभी-कभी गोलियों के बीच, दंगों के बीच, जंगल में जानवरों के बीच अपने जुनून के साथ खड़े रहकर अपने दर्शकों तक सभी तरिके के सजीव चित्रण को पहुँचा रहे हैं । उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव- सरतोली, जिला-चमोली, से आए इस नवयुवक ने अपनी एक नई दूनिया बनाई । एक कैमरामैन की दुनिया लेन्स के पीछे की होती है, जहाँ वे पूरी दुनिया को खबर दिखाते है पर खुद कभी सामने नहीं आते। आज मैं आप को ABP न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित चैनल में काम करने वाले सीनियर कैमरामैन श्री प्रेम सिंह फर्स्वाण से मिलवायेंगे और उनके अनुभव से रूबरू होंगे जिसमें वे अपने ❤️ दिल की बात आप से  करते नज़र आएंगे । (२५ दिसंबर २०२५) My Youtube link :- https://youtube.com/@prashantjksharma?si=X58D6nfXaNuz1pLb -प्रशांत जे.के.श...

Title शीर्षक, नाम, उपाधि, पदवी, B230

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उपाधि:- * रावल*, उस समय मेवाड़ के शासकों को 'रावल' की उपाधि दी जाती थी। हंमीर के समय से बहां के शासकों ने 'राणा' उपाधि अंगीकार की, जो व्यवहारतः चलती रही, प्रताप भी राणा प्रताप ही थे, परंतु कुछ अभ्यास में, कुछ आदर में, 'राणा' 'महाराणा' कहे जाने लगे। हंमीर ने मेवाड़ का भाग्य - बदला था, उसी के समय से वहां के शासकों की उपाधि बदली, जो अपने वृहदाकार 'महाराणा' के रूप में भारत के स्वतंत्र होने पर मेवाड़ के भारत में विलय तक चलती रही, और अब भी श्रद्धा की परंपरा जो मेवाड़ ने अपने लिए निर्मित की उसी के कारण मेवाड़ के शासक 'महाराणा' उपाधि के साथ ही स्मरण एवं सम्मान प्राप्त किए हुए हैं देश में किसी अन्य राजवंश को यह उपाधि प्राप्त नहीं थी, न अब किसी अन्य के लिए इसका उपयोग होता है।

Shri Neeb karori maharaj Part-2 B229

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उत्तराखण्ड में हनुमान मंदिरों की स्थापना:- नीब करौरी बाबा द्वारा सम्पन्न  उत्तराखण्ड-वासियों की अपने प्रति निष्ठा, सहज-प्रेम और अफ्नत्व के प्रतिदान स्वरूप महाराज जी ने भी उनके प्रति अपने अमर प्रेम की प्रतिमूर्तियाँ श्री बजरंगगढ़ हनुमान मंदिर (नैनीताल)तथा श्री कैंची हनुमान मंदिर(निकट भीम ताल) एवं आश्रम उन्हें प्रदान कर दिये, जिनका सूक्ष्म में वर्णन प्रस्तुत है बजरंगगढ़:- बजरंगगढ़ उत्तराखण्ड में बाबा जी द्वारा स्थापित प्रथम हनुमान-मंदिर है। नैनीताल से डेढ़ कि०मी० दूर स्थित नैनीताल हल्द्वानी मोटर मार्ग में घाटी नामक स्थान में बजरी के एक ऊँचे पहाड़ी टीले को बाबा जी ने इस मंदिर की स्थापना  की ।चबूतरे के ऊपर (गुफा का कुछ भाग लिये) हनुमान जी का मंदिर बन गया जिससे सटकर श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर, शिव मंदिर और कीर्तन भवन (जिसके एक भाग में बाद में बाबा जी ने श्री वैष्णवी दैवी के मंदिर की स्थापना की व्यवस्था कर दी थी) देखते-देखते खड़े हो गये। साथ में कुछ आवासीय कुटियों भी बन गई। बीहड़ जंगल एवं बड़ी-बड़ी चट्टानें हटाकर भूमि को समतल कर, दक्षिण की ओर कुछ ऊँचाई में अद्वैत आश्रम भी बन गया। विभ...

Shri Neeb karori maharaj Part-1 B228

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                      🌹कहानी  श्री नीब करौरी महाराज की🌹 अब- ग्राम नीब करौरी जिला- फरुखाबाद उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश के -(तब) आगरा जिले के नागउ ग्राम समूह के अकबरपुर ग्राम में एक कुलीन, संभ्रान्त, वैभव-पूर्ण ब्राह्मण परिवार में प्रगटे श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा (बाबा जी महाराज) धन-धान्य से परिपूर्ण, सम्पत्ति युक्त अपने पूर्वजों की जमीन्दारी एवं वैभव को बाल्यावस्था-किशोरावस्था के बीच की वय में ही त्यागकर घर से निकल गये थे। जन कल्याणार्थ ,और वह सुप्रसिद्ध रेल-प्रसंग जिसे श्री के० एम० मुंशी ने अपने भवन्स जरनल में भी प्रकाशित करवा दिया था । अपनी मौज में एक दिन बाबा जी महाराज पास के स्टेशन से उस रेलगाड़ी के फर्स्ट क्लास डिब्बे में बैठ गये जो नीब करौरी गाँव से गुजरती थी । गाड़ी के कुछ मील तक चल चुकने के बाद डिब्बे में एक एंग्लो-इंडियन टिकट चेकर आ गया और एक अर्धनग्न भारतीय साधू को चिमटा कमण्डल लिये डिब्बे में बैठा देख अचकचा गया। टिकट मांगने पर नकारात्मक उत्तर पाकर उसने क्रोध में साधू को अपशब्दों से तिरस्कृत कर एक फ्लैग स्टेशन पर गाड़...

don't(Curse) श्राप ना दें ? B227

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 "भगवान परशुराम से सान्दीपनि ऋषि के शिष्यों ने प्रश्न पूछा की गुरुदेव क्या श्राप देकर विनाश किया जा सकता है।" :- भगवान परशुरामजी ने कहा "श्राप का अर्थ समझते हो?" परशुराम के प्रश्न पर सभी शिष्य चौंक उठे। क्या उत्तर दें, किसी शिष्य के कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। इस पर श्रीकृष्ण ने कहा – “पूज्यवर ! अब आप ही समझाएँ।" "तुम सब कुछ जानते हुए भी, मुझसे सुनना चाहते हो...तो सुनो हे वासुदेव श्री कृष्ण – श्राप दिया जाता है शास्त्र विरोधी आचरण करने वाले आततायियों को। किन्तु श्राप देने वाले को कई बार सोचना पड़ता है कि वह श्राप दे या न दें, (क्योंकि श्राप देने वाले व्यक्ति के पुण्यों का क्षय अवश्यंभावी होता है। (श्राप का अर्थ है प्रकृति के कार्यों में व्यवधान डालना। प्रकृति को इस सीमा तक विवश कर देना कि श्राप की वांछित परिणति घटित हो जाए। प्रकृति ऐसी स्थिति में श्राप देने वाले का अहित भी कर सकती है।) मैं नहीं चाहता था कि अतीन्द्रिय शक्तियों का प्रयोग दुष्टों के विरूद्ध किया जाए। दुष्टों का विनाश उन्हीं की शैली (अर्थात् युद्ध के द्वारा किया जाना चाहिए , एवं स्वयं की तपस...

Aarakshan B226

कश्यप ऋषि के प्रश्न का उत्तर देते हुए भगवान श्री परशुरामजी ( वर्णन):- आरक्षण के विषय पर "मात्र योग्यता ही मापदण्ड हो" ।  "गुरूवर कश्यप ! शासन को यदि शुद्ध और पारदर्शी बनाना है तो उसके अधिकारी और कर्मचारियों का चयन योग्यता के मापदण्डों पर किया जाए। सुयोग, साहसी एवं तुरंत निर्णय लेने वाले व्यक्तियों पर ही शासन का भार डाला जाना चाहिए। यदि ऐसे कुशल लोग दासों में मिलते हैं तो उन्हें भी बिना भेदभाव के शासन में लिया जाना चाहिए। किन्तु वंश, दरिद्रता या उपेक्षित समाज की सदस्यता को कभी भी शासकीय सेवाओं का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। मानव पुत्र होने के कारण नागों और व्रात्यों जैसे लोगों के लिए रोटी, कपड़ा और आवास की सुविधाएँ दी जानी चाहिए। उनके बालकों को आश्रमों में भेज कर संस्कारित करना चाहिए। उनकी सहायता करें, इसमें किसी को भी कोई आपत्ति नही है किन्तु सत्ता के अधिकार का भार वहन करने का मापदण्ड एक ही होना चाहिए। शासन, प्रतिभाओं पर टिकना चाहिए। उपेक्षित समाज में पैदा होना, शासन की भागीदारी का यदि आधार बन गया तो वह राज्य कभी भी सुराज्य नहीं कहा जाएगा। शासन, दान पुण्य के नाम पर, उपेक...

Shri.Kedar ek vritant yatra B225

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श्री केदार एक वृतांन्त यात्रा जय श्री केदार , यात्रा के एक माह पूर्व सर्वप्रथम केदारनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन उत्तराखण्ड के चारधाम यात्रा साइड पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर लिया गया। इसके बाद रेलवे का रिर्जवेशन किया गया, लखनऊ से देहरादून के लिये, आप हरिद्वार तक का भी करा सकते है। इसके पश्चात् देहरादून से श्री केदारनाथ यात्रा के लिये टैक्सी की बुकिंग चार दिनों के लिये सोलह हजार रुपये में किया गया। वैसे हरिद्वार से ही सीधा रास्ता है, हरिद्वार से- ऋषिकेश से-देवप्रयाग- से श्रीनगर से- रुद्र‌प्रयाग से- तिलवाड़ा-से अगस्तमुनि- से गुप्तकाशी-से सोनप्रयाग- से गौरीकुंड- से 22 कि.मी. की चढ़ाई के बाद श्रीके‌दारनाथ जी का द्विव्य दर्शन प्राप्त होता है। लखनऊ में 31 मई 2024 को सुबह 3:30 पर उठकर में तैयार होने लगा। परिवार के सभी सदस्यों को मैंने जगा दिया। सभी लोग पैकिंग के साथ 4:20 तक तैयार हो कर ई-रिक्शा के माध्यम से लखनऊ रेलवे स्टेशन छोटी लाइन पर प्लेटफार्म नम्बर 6 पर पहुँच कर वन्दे भारत ट्रेन से देहरादून के लिये यात्रा आरंभ कर दिये ट्रेन में नाश्ता चाय की व्यवस्था थी। भोजन का अलग से पेमेंट किया गया। 104 कि.मी...

Sri.Kedarnath dham yatra B224

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                               🌹श्री केदारनाथ धाम यात्रा🌹 जय श्री केदार,यात्रा के प्रारम्भ में गर्म कपड़ों को खरिद लेनी चाहिए क्योंकि जीरो डिग्री से 3 डिग्री ठंडक में गर्म वस्त्र से ही काम चल पाएगा  इसके लिये जीरो डिग्री के वाले गर्म वस्त्र  की खरीददारी कर लेना चाहिए । रेलवे से यात्रा के लिए रिजर्वेशन एक माह पूर्व में कर लें , या कार टैक्सी की बुकिंग  फिर उत्तराखंड चार धाम यात्रा का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन आवेदन कर लें , यह सभी कार्य एक माह पूर्व कर लें जिससे कि कोई असुविधा न हो , अब जानते हैं कि श्री केदारनाथ जी कौन हैं ? श्री केदारनाथ से श्री बद्रीनाथ पर्वत की दूरी लगभग 33 किलोमीटर की है ,  भगवान शिव व माता पार्वती ने अपना बद्रीनाथ धाम का घर भगवान विष्णु को सौंप कर अपना नया निवास स्थान श्री केदारखण्ड पर्वत पर बनाया जो कि केदारनाथ जी के नाम से विख्यात है। इसके पीछे एक कथा है बद्री क्षेत्र में भगवान नारायण (विष्णु) एक बार इस क्षेत्र में पहुंचे तब उन्होंने ने यहाँ की सुन्दरता शांत वातावरण को ...

DEV BHUMI UTTRAKHAND B223

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आज वर्तमान काल कलयुग में  बद्रीनाथ धाम , केदारनाथ धाम ,  गंगोत्री धाम , यमुनोत्री धाम के दर्शनों के लिए इतनी भीड़ क्यों है , ऊँचाई के साथ दुर्गम रास्ते , और कहीं कहीं पर ऑक्सीजन की कमी ,ठंडी ,बारिश,तेजधूप, भूस्खलन को देखते हुए भी लोग अपनी जान जोखिम में डाल कर पवित्र देवभूमि उत्तराखंड के चारधाम की यात्रा क्यों करते हैं  , एक तो कहावत है कि स्वर्ग की हवा (शुद्ध वातावरण) चाहिए तो देवभूमि उत्तराखंड चार धाम की यात्रा पर चलिए । जो कि मनुष्य के आयु को बढ़ाता है और निरोगी काया कल्प मनुष्य को उत्तराखंड की पावन भूमि हमें देती है तो आइये जानते हैं इसके महात्म्य को हिमालय पांच खंडों बटा है इनमें नेपाल, कुर्मांचल, कुमायूं, केदारखंड, जालंधर, कश्मीर हैं । इसमें उत्तराखंड के केदारखण्ड में बद्री क्षेत्र की रमणीय पर्वत श्रेणियां, कल- कल बहती भगवती गंगा अलकनंदा का मनोरम छटा देखते ही बनता है । बद्रीनाथ से लगभग 33 किलोमीटर की दूरी पर दूसरे पर्वत पर भगवान शिव व माता पार्वती ने अपना बद्रीनाथ धाम का घर भगवान विष्णु को सौंप कर अपना नया निवास स्थान श्री केदारनाथ धाम केदारखण्ड पर्वत पर बनाया जो कि के...

SriRam bhagwan ki (Vanshavali) B222

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१४ अप्रैल २०२४ दिन रविवार , स्पष्ट आवाज़ राष्ट्रीय हिंदी दैनिक समाचार पत्र , अंक २८७(287) , पृष्ठ ६ ,विचार । लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, ललितपुर से प्रकाशित ।  भारतीय परंपरा के अनुसार भगवान श्रीराम २४वें त्रेतायुग में अवतीर्ण हुए । मनुसंवत १०,२३,८३३०० से १०,२३,८४३०० वर्ष के बीच मनुसंवत का अर्थ है तेईस पर्याययुगों की तथा चौबीसवें कृतयुग एवं त्रेतायुग की समन्वित कालावधि का अर्थ है की २४वें त्रेतायुग के अन्तिम सात सौ तथा द्वापरयुग के प्रारंभिक तीन सौ वर्षों में श्रीराम इस पुण्य धरा पर विराजमान रहे । सूर्यवंश में सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र, मोरध्वज, दिलीप, रघु, अज, दशरथ के बाद ६३ वीं पीढ़ी में अयोध्या में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था । वर्तमान कल्प के चक्रवर्तियों की यह परंपरा स्वयंभू भगवान मनु से आरंभ बताई जाती है जिनकी राजधानी अयोध्या के रूप में वर्णित है। चक्र का संबंध केवल किसी एक पिंड अथवा आकृति से नहीं है। यह चक्र काल यानी समय का है, यह चक्र जीवन का है, यह चक्र ब्रह्माण्ड और उसकी गति का है, यह चक्र वंशानुक्रम का है। यह चक्र निमिष, प्रहर, दिवस, रात्रि, पक्ष, मास, ऋतु, वर्ष, शताब्दी, युग औ...

MSP-Minimum Support Price B221

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एम.एस.पी. पर क्यों किसान आंदोलन कर रहे हैं ? किसानों की मांग है कि MSP को नये कृषि कानून 2020 में जगह दी जाए । न्यूनतम समर्थन मूल्य MINIMUM SUPPORT PRICE (MSP)  एक न्यूनतम मूल्य है जो केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए लाभकारी समझी जाने वाली किसी भी फसल के लिए निर्धारित किया जाता है। एम.एस.पी. एक प्रकार का बाजार हस्तक्षेप है जिसका उपयोग भारत सरकार द्वारा किसानों को कृषि कीमतों में भारी गिरावट से बचाने के लिए एक बीमा के रूप में किया जाता है। यदि अत्यधिक उत्पादन और बाजार में अधिकता के कारण वस्तु का बाजार मूल्य घोषित न्यूनतम मूल्य से कम हो जाता है तो सरकारी एजेंसियां किसानों द्वारा उत्पादित फसलों को निर्धारित न्यूनतम मूल्य पर खरीद लेती हैं। यह सरकारी संस्थाओं द्वारा एक निश्चित फसल खरीदने पर भुगतान की जाने वाली राशि भी है। खरीद मूल्य वह मूल्य है जिस पर फसल खरीदी जाती है। एम.एस.पी. की घोषणा फसल बुआई से पहले की जाती है जबकि खरीद मूल्य का निर्धारण फसलों की कटाई के बाद किया जाता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पहली बार केंद्र द्वारा 1966-67 में स्थापित किया गया था। पहली बार गेहूं का एमएसपी ...

UCC LAW B220

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*समान नागरिक संहिता (कानून) UCC- (Uniform Civil Code)* राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र स्पष्ट आवाज़ , ८ फरवरी २०२४ , लखनऊ ,गोरखपुर , कानुपर , ललितपुर से प्रकाशित , लेख :- UCC (प्रशांत शर्मा) . देश में अतिशीघ्र UCC कानून लागू होने की कवायद शुरू हो गई है इस पर गहन विचार विमर्श चल रहा है सब कुछ सही रहा तो शायद चुनाव के पहले इसे वर्तमान सरकार लागू कर सकती है, इस आधार पर भारत के हर नागरिक को जानना आवश्यक है कि क्या है यह कानून तो आईए जानते हैं इस कानून के विषय में, हाल ही में विधि आयोग ने एक परामर्श पत्र जारी करते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि सभी निजी कानूनी प्रक्रियाओं को संहिताबद्ध करने की जरूरत है ताकि उनके पूर्वाग्रह और रूढ़िवादी तथ्य सामने आ सकें। इसमें प्रमुख मुद्दा गौरतलब है कि हाल के वर्षों में समान नागरिक संहिता पर सियासी और सामाजिक दोनों ही माहौल गर्म रहा है। एक ओर जहाँ देश की बहुसंख्यक आबादी समान नागरिक संहिता को लागू करने की पूरे जोर शोर से लागू करने के लिए मांग उठाती रही है, वहीं अल्पसंख्यक वर्ग इसका विरोध करता रहा है। ऐसा क्या है इस कानून में, क्या है समान नागरिक संहिता ? सबसे पहल...

CAA & NRC LAW B219

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राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र स्पष्ट आवाज़ ४फरवरी २०२४ लेख । क्या है CAA और NPR & NRC LAW । वर्तमान में सबसे ज्वलंत मुद्दों में से है CAA और NRC कानून का मुद्दा , हर जगह इसकी चर्चा हो रही है कोई कहता है इसे लागू किया जाना चाहिए कोई कहता है नही इससे नुकसान होगा । (आज दिनांक 12 मार्च 2024 को पूरे देश में CAA नागरिकता अधिनियम संशोधन 2019 को लागू कर दिया गया है ।) संशोधन अधिनियम2019 के पहले भारत की नागरिकता पाने के लिए कम से कम 11 साल तक भारत में रहना आवश्यक था ।अब नागरिकता संसोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत इस नियम को आसान बनाया गया है । कानून को जानना आवश्यक है कि यह क्यों है किस कारण यह कानून लाया जा रहा है । कहा जा रहा है कि एक सप्ताह तक पूरे  देश में यह नया कानून लागू होने जा रहा है, तो आइए जानते हैं क्या है , नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019, CAA- Citizenship Amendment Act , और राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरन, राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरन NPR- National Population Register और NRC- National Register of Citizens . इसे लेकर देश का बड़ा वर्ग बहुत ही परेशान है। आइये जानते है इसके बारे में। नागरिकता ...

Social Aspects & Relationships B218

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सोशल साइट्स और संबंध रिश्तों में संवादहीनता ला रहा दुनिया से जोड़ने वाला मोबाइल , यह माने या न माने, वास्तविकता में मोबाइल के हद से ज्यादा उपयोग से सामाजिक रिश्तों में हम सब की , समाज की दिक्कतें बढ़ी हैं। मोबाइल फोन के अनुचित उपयोग के कारण आपसी रिश्तों को नुकसान पहुंचाने वाली जो नई आदतें बन रही हैं, उनमें फबिंग भी शामिल है। स्मार्ट फोन पर चिपके रहने के कारण जब आप अपने करीबी रिश्ते को इग्नोर करते हैं, तो उसे फबिंग कहा जाता है। फबिंग एक ऐसा शब्द है जो स्मार्टफोन की लत से जुड़ा है। यह शब्द फोन और स्नबिंग से मिलकर बना है। ( स्नबिंग का मतलब होता है अनादर करना या फिर अनदेखी करना )। जो लोग दोस्तों, परिवार और समाज में लोगों के बीच बैठकर फोन में ज्यादा ध्यान देते हैं, या कह लीजिए कि अब वो मोबाइल पर ही निर्भर हो गए हैं , मोबाइल ही अब उनकी दुनिया है । यह शब्द ऐसे लोगों के लिए प्रचलित है। स्मार्टफोन के इस्तेमाल और फबिंग को लेकर की गई एक स्टडी के मुताबिक लगभग 32 प्रतिशत लोग दिन में कम से कम 3 से 4 बार लोगों के बीच फबिंग करते हैं। फबिंग का नकारात्मक प्रभाव आपके सामाजिक, पारिवारिक जीवन और मानसिक स्व...