Title शीर्षक, नाम, उपाधि, पदवी, B230


उपाधि:- * रावल*, उस समय मेवाड़ के शासकों को 'रावल' की उपाधि दी जाती थी। हंमीर के समय से बहां के शासकों ने 'राणा' उपाधि अंगीकार की, जो व्यवहारतः चलती रही, प्रताप भी राणा प्रताप ही थे, परंतु कुछ अभ्यास में, कुछ आदर में, 'राणा' 'महाराणा' कहे जाने लगे। हंमीर ने मेवाड़ का भाग्य - बदला था, उसी के समय से वहां के शासकों की उपाधि बदली, जो अपने वृहदाकार 'महाराणा' के रूप में भारत के स्वतंत्र होने पर मेवाड़ के भारत में विलय तक चलती रही, और अब भी श्रद्धा की परंपरा जो मेवाड़ ने अपने लिए निर्मित की उसी के कारण मेवाड़ के शासक 'महाराणा' उपाधि के साथ ही स्मरण एवं सम्मान प्राप्त किए हुए हैं देश में किसी अन्य राजवंश को यह उपाधि प्राप्त नहीं थी, न अब किसी अन्य के लिए इसका उपयोग होता है।

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