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Vote 2022 B144

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                🥇श्रीमती जी के साथ वोट देते हुए🥇           🇮🇳जागरूक नागरिक , मेरा वोट , मेरी ताकत🇮🇳                          🇮🇳सशक्त लोकतंत्र🇮🇳       🌺  विधानसभा चुनाव २०२२ उत्तरप्रदेश ,  भारत 🌺

स्वास्तिक का महत्व B143

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                          🕉️हिन्दू संस्कार🕉️                       🕉️स्वस्तिक का महत्व 🕉️ *स्वास्तिक का चिन्ह किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले हिन्दू धर्म में स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसकी पूजा करने का महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्य सफल होता है। स्वास्तिक के चिन्ह को मंगल प्रतीक भी माना जाता है। स्वास्तिक शब्द को ‘सु’ और ‘अस्ति’ का मिश्रण योग माना जाता है। यहां ‘सु’ का अर्थ है शुभ और ‘अस्ति’ से तात्पर्य है होना। अर्थात स्वास्तिक का मौलिक अर्थ है ‘शुभ हो’, ‘कल्याण हो’।* *शुभ कार्य यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य के दौरान स्वास्तिक को पूजना अति आवश्यक माना गया है। लेकिन असल में स्वस्तिक का यह चिन्ह क्या दर्शाता है, इसके पीछे ढेरों तथ्य हैं। स्वास्तिक में चार प्रकार की रेखाएं होती हैं, जिनका आकार एक समान होता है।* *चार रेखाएं मान्यता है कि यह रेखाएं चार दिशाओं - पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण की ओर इशारा करती हैं। लेकिन हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह...

शुभकामनाएं संक्रान्ति B142

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     2022  🌺जय श्री कृष्ण🌺

कण कण में ईश्वर B 141

 🚩  औघड़ वाणी  🚩  🌷आपके सामने से ही आपका देवता अनेकों बार रोज गुजर जाता है । भगवान सदाशिव, वह अक्षोभ्य अघोर भैरव बार-बार गुजरते हैं, वह शिव और पार्वती बार-बार गुजरते हैं आपके सामने से । आपको हर सुबह और हर  शाम आपके बाल-बच्चे, परिवार और परिजन या आपके घर में जो जीव-जन्तु हैं उनसे तथ मिलने-जुलने वालों से आपको हरदम संकेत मिलता रहता है । मगर उनका संकेत सुनने-समझने के लिये आपके पास फुर्सत नहीं होती है ।  🌷 🌿 अपने को खाली न रखकर आपने अपने अन्दर इतना कूड़ा-कर्कट इकट्ठा कर रखा है, आपके मस्तिष्क में इतना धूल-गुब्बार भरा हुआ है कि आप समझ नहीं पाते हैं ।  🌿 🌷जय श्री कृष्ण🌷 .                             ......अघोर वचन शास्त्र ( पृ क्र 281 )

संस्कृति B140

कवि  का नाम नहीं  पता पर जिसने भी लिखा , लिखा आज का कड़वा सच है :- एक दिन...! मेरे परदादा, संस्कृत और हिंदी जानते थे।  माथे पे तिलक, और सर पर पगड़ी बाँधते थे।।  फिर मेरे दादा जी का, दौर आया।  उन्होंने पगड़ी उतारी, पर जनेऊ बचाया।। मेरे दादा जी, अंग्रेजी बिलकुल नहीं जानते थे। जानना तो दूर, अंग्रेजी के नाम से कन्नी काटते थे।।  मेरे पिताजी को अंग्रेजी, थोड़ी थोड़ी समझ में आई।  कुछ खुद समझे, कुछ अर्थ चक्र ने समझाई।। पर वो अंग्रेजी का प्रयोग, मज़बूरी में करते थे। यानि सभी सरकारी फार्म, हिन्दी में ही भरते थे।। जनेऊ उनका भी, अक्षुण्य था। पर संस्कृत का प्रयोग, नगण्य था।।  वही दौर था, जब संस्कृत के साथ, संस्कृति खो रही थी। इसीलिए संस्कृत, मृत भाषा घोषित हो रही थी।। धीरे धीरे समय बदला, और नया दौर आया।  मैंने अंग्रेजी को पढ़ा ही नहीं, अच्छे से चबाया।। मैंने खुद को, हिन्दी से अंग्रेजी में लिफ्ट किया।  साथ ही जनेऊ को, पूजा घर में सिफ्ट किया।। मै बेवजह ही दो चार वाक्य, अंग्रेजी में झाड जाता हूँ। शायद इसीलिए समाज में, पढ़ा लिखा कहलाता हूँ।।  और तो और, मैं...

बुरी आत्मा की साया B139

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             🙏🌺जय श्री भगवान राम अवधूत🌺🙏 🌷अपने गुरू द्वारा दिया गया इष्ट मन्त्र जपने के पश्चात् हवन करते हैं । हवन के समय तीन अंगुलियों से ( बुराई देखने वाली अंगुली को छोड़कर ) सावधानी पूर्वक आहुति देनी चाहिये । हवन सामग्री को फेंकने जैसी हाथ की मुद्रा नहीं होनी चाहिये । अग्नि की पत्नी ( स्वाहा ) के नाम पर आहुति के समय अन्त में स्वाहा बोलना चाहिये । एक हाथ से यह नहीं होना चाहिये । जिसके पास एक ही हाथ हो, उसे मनसा दूसरा हाथ वहाँ पर रख लेना चाहिये । प्रायः ऐसे अंग-भंग लोगों के अधिकार क्षेत्र की यह बात नहीं है फिर भी यदि मन में श्रद्धा है तो कर सकते हैं । उसके लिये कोई प्रतिबंध नहीं है । अपने गुरू द्वारा दिये गये इष्ट मन्त्र को जपने के पश्चात्----  आकाश शान्तिः, पृथ्वी शान्तिः, चारों दिशायें शान्तिः, नदि शान्तिः, पर्वत शान्तिः, वनस्पति शान्तिः इत्यादिक सबके लिये शान्ति-पाठ कर के शान्ति आहुति देकर और ग्राम, नगर क्षेत्र तथा उस स्थान आदि की जो बुरी आत्माएँ हैं उन सभी आत्माओं को शान्त करने के पश्चात् तब फिर अपने मन्त्र का जाप करके और अन्त में स्वाहा...

Book Launch Jeevan ek Sarita "The Life" B 138

🌺जय श्री कृष्ण🌺

The Life B137

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 भगवान श्री कृष्ण, पिता श्री स्व. डॉ. जे. के. शर्मा ही "जीवन एक सरिता"  (द लाइफ) पुस्तक को बनाने में प्रेरणा स्रोत रहें हैं । इनके चरणों में कोटि - कोटि प्रणाम । आप लोगों का संदेश पढ़ा बहुत अच्छा लगा । मेरा  शतप्रतिशत प्रयास है कि इस पुस्तक से आपका सम्पूर्ण लगाव होगा । इसका कारण होगा सभी रिश्तों ,पात्रों  को कहानी विषय के अनुसार अपने अपने जगह पर उचित स्थान दिया जाना  है। जीवन में पिता का स्थान बहुत ऊंचा है , यह पुस्तक उनको समर्पित है । मैं आपको शतप्रतिशत विश्वास दिलाता हूँ , इन 11 कहानियों के अंदर ही सम्पूर्ण मानव जीवन है । यही पुस्तक की विशेषता है। सभी विषयों पर गहन अध्ययन कर मैंने इस पुस्तक की रचना की है ।  "जीवन एक सरिता" { THE LIFE } पुस्तक के शीर्षक में , यह सच है मेरी धर्म पत्नी का नाम है ,धर्म पत्नी से ही घर में सुख शांति रहती है । जीवन की यात्रा में एक पुस्तक लिख रहा हूँ तो उनका कही न कही मुख्य रूप से नाम लिखना चाहता था वो ईश्वर की कृपा एवं आप लोगों के आशीर्वाद से सम्पूर्ण किया है, इसी के साथ साथ जीवन एक नदी की भांति चलती ही जाती है जीवन में कई उतार ...

नई बजाज पल्सर N250/F250B136

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               WRITTEN BY PRASHANT SHARMA *Bajaj Pulsar New Model 2021 : आ गई युवा दिल की धड़कन पल्सर, नए मॉडल में मचाई धूम* https://newstrack.com/country/bajaj-pulsar-new-model-2021-badshah-is-back-yuva-dil-ki-dhadkan-bajaj-launched-pulsar-n250-pulsar-f250-new-iconic-design-same-semi-faired-setup-293738

तान्हाजी मालुसरे B135

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        🌹नरवीर सुबेदार तान्हाजी मालुसरे वंशावली🌹             १-  कालोजीराव मालुसरे             २-  तान्हाजी कालोजीराव मालुसरे             ३-  रायबा तान्हाजी मालुसरे             ४-  मुंबाजी रायबा मालुसरे             ५-  येसाजी मुंबाजी मालुसरे             ६-  सूर्याजी येसाजी मालुसरे              ७- येसाजी सूर्याजी मालुसरे              ८- अप्पाजी येसाजी मालुसरे              ९- बलवंतराव अप्पाजी मालुसरे              १०- नारायणराव बलवंतराव मालुसरे             तानाजी-                           बालकृष्ण-      .नारायण...

Social Media & Relationships B134

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                    सोशल मीडिया एवं सम्बन्ध सोशल मीडिया और सम्बन्ध वर्तमान में समाज का सबसे ज्वलंत मुद्दा है । यह वह प्लेटफार्म है जिसमें हम किसी व्यक्ति को जानते हो या जीवन में कभी भी उससे  मिले हो या न मिलें हों , या जिससे तुरन्त भेंट हुई हो या जान पहचान निकला हो , उसे हम तुरन्त फेसबुक , व्हाट्सएप , इंस्टाग्राम , ट्विटर आदि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उससे फ्रेंडशिप कर सम्पर्क में आते हैं एवं उसके साथ कोट्स, चैटिंग , बात करने लगते है । इसका कोई किनारा , अंत नही है। वर्तमान में आनंद व समय बिताने का एक बड़ा माध्यम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन गया है । सच्चाई से कोसों दूर भागने का माध्यम है । आप अपने आप को धोखा दे रहे हैं । झूठे आनंद के लिए इसका सहारा लेकर वास्तविक जीवन से दूर भागते हैं । आज हर परिवार में सभी के पास अपना - अपना मोबाइल फोन है । परिवार में हर व्यक्ति का परिवार के सदस्यों का अपना अलग-अलग सोशल मित्र या कह लीजिए नेटवर्किंग है उसी के साथ हर सदस्य व्यस्त हैं परिवार के सदस्यों को महत्व न देकर झूठे सोशल मित्रों को महत्व दिया जा रहा...

दान ऋण B132

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 प्रेस विज्ञप्ति... दिनांक-01-07-21 *प्रत्येक गृहस्थ को देव ऋण चुकाना पडता है- स्वामी मुक्तिनाथानंद*  लखनऊ मठ । *कलयुग में दान ही सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है-स्वामी जी* बृहस्पतिवार के प्रातः कालीन सत्  प्रसंग में रामकृष्ण मठ लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद जी ने बताया कि भारतीय संस्कृति के अनुसार प्रत्येक गृहस्थों का तीन ऋण होता है यथा- देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण। इनमें से माना जाता है कि देव ऋण भगवान विष्णु का है। यह ऋण नहीं चुकाने से दैवीय दुःख अर्थात ऊपरी शक्तियों द्वारा कष्ट मिलता है। स्वामी जी ने बताया कि भगवत् गीता में कहा गया है कि दुःख त्रिविध होता है-आदि भौतिक, आदि दैविक और आध्यात्मिक। इस त्रिविध दुःख में जो आदि दैविक दुःख है, जो अलौकिक दुःख है नाना प्रकार का प्राकृतिक दुर्दैव भूकंप, अनावृष्टि, अतिवृष्टि, झंझावात अतिमारी, महामारी इत्यादि। इस महामारी का कारण है कि मनुष्य जब देव ऋण चुकाने से उदासीन हो जाता है तब ऐसी महामारी का प्रकोप बढ जाता है। उन्होंने कहा कि यह ऋण उत्तम चरित्र रखते हुए दान और यज्ञ करने से चुकता होता है जो लोग धर्म का अपमान करते हैं या धर्म के बारे म...

सकारात्मक दृष्टिकोण B131

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 🌼🌿  एक कथानक ----- पूज्यश्री के श्रीमुख से ---------- !            🔱🌷 गुरू से शिष्य ने कहा: गुरूदेव !  एक व्यक्ति ने आश्रम के लिये गाय भेंट की है। गुरू ने कहा अच्छा हुआ । दूध पीने को मिलेगा।  एक सप्ताह बाद शिष्य ने आकर गुरू से कहा: गुरू ! जिस व्यक्ति ने गाय दी थी, आज वह अपनी गाय वापिस ले गया ।  गुरू ने कहा - अच्छा हुआ ! गोबर उठाने की झंझट से मुक्ति मिली ।  'परिस्थिति'  बदले तो अपनी 'मनस्थिति' बदल लो , बस दुख सुख में बदल जायेगा...। "सुख और दुख आख़िर दोनों मन के ही तो समीकरण हैं।  "अंधे को मंदिर आया देखलोग हँसकर बोले -"मंदिर में दर्शन के लिए आए तो हो , पर क्या भगवान को देख पाओगे ?  "अंधे ने कहा  - " क्या फर्क पड़ता है ,  भगवान तो मुझे देख लेगा . .  🌷  "  दृष्टि नहीं दृष्टिकोण सकारात्मक होना चाहिए  " । 🌷 💖जय श्री कृष्ण💖

Shivaji Raje Ek Drishti Mai B129

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      "भाग्यशाली" छत्रपति शिवाजी महाराज एक दृष्टि में :- घराना :- भोंसले । पिता :- शाहजी राजे भोंसले , जन्म - १५९४ । माता :- जीजाबाई , जन्म - १५९६ । पुत्र :- जन्म -  शिवाजी महाराज जन्म - १९ फरवरी १६३० ( शिवनेरी किला ) ।  पुत्र :- एकोजी राजा ( शिवाजी महाराज के सौतेले भाई ) निधन शिवाजी महाराज :- ३ अप्रैल १६८० ( रायगढ़ किला ) ।        ( सम्पूर्ण जीवन :- ५० वर्ष , १ माह , १५ दिवस ) राज्याभिषेक शिवाजी महाराज :-  ६ जून १६७४ । १६७४ ई. प.भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी । शासनावधि शिवाजी महाराज :-  १६७४ -  १६८० ।  छत्रपति शिवाजी महाराज की श्री पत्नियों के नाम :-  १-  सईंबाई निम्बालकर १६४० -  १६५९ । २-  सोयराबाई मोहिते १६८० । ३-  पुतळाबाईं पालकर १६५३ -  १६८० । ४-  सगुणाबाई  ५-  काशीबाई ६-  गुणवंताबाई ७-  शकरवरबाई गायकवाड़ १६५६ -  १६८० । ८-  लक्ष्मीबाई । छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र एवं पुत्रियां :-  पुत्र :- सम्भाजी महराज , माता ( सईंबाईं निम्बालकर ) पुत्र :-...

श्री राम के१४ वर्ष B130

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                         श्री राम भगवान के चौदह वर्ष  १-अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर उन्होंने नाव से नदी पार की।  -प्रयागराज से 20-22 किलोमीटर दूर वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जो निषादराज गुह का राज्य था। यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने केवट से गंगा पार करने को कहा था। श्रृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।  २-सिंगरौर में गंगा पार कर श्रीराम कुरई गाँव में रुके थे।  ३-कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे थे। प्रयाग को कभी इलाहाबाद कहा जाता था। आज फिर इसका नाम प्रयाग है।   ४-प्रभु श्रीराम ने प्रयाग संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और फिर पहुंच गए चित्रकूट। चित्रकूट वह स्थान है, जहां राम को मनाने के लिए भरत अपनी सेना के साथ पहुंचते हैं। तब जब दशरथ का देहांत हो जाता है। भरत यहां से राम की चरण पादुका ले जाकर उनकी चरण पादुका रखकर राज्य करते हैं। ५ -चित्रकूट के पास ही मध्यप्रदेश में सतना स्थित है। यहाँ अत्रि ऋषि का आश्रम था। हालांकि सती अनुसूइया क...

Bhagwan Shri. PARSHURAM Part-1B128

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                                               💓💖 भगवान परशुराम 💖💓 भगवान परशुराम त्रेता युग में एक ब्राह्मण ऋषि के यहां जन्मे थे। कहा जाता है कि भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। जिसे अवेशावतार कहते हैं। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इंदौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में हुआ। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम कहलाए। जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये। आरम्भिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से शार्ङ्ग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि कश्यप से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ।  तदनन्तर कैलाश गिरिश्रृंग पर स्थित भगवान शंकर...

ब्राम्हण वंशावली B127

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                                                     ब्राह्मणों की वंशावली                  ——————————————— भविष्य पुराण के अनुसार ब्राह्मणों का इतिहास -प्राचीन काल में महर्षि कश्यप के पुत्र कण्वय की आर्यावनी नाम की देव कन्या पत्नी हुई। ब्रह्मा  की आज्ञा से  दोनों कुरुक्षेत्र वासनी सरस्वती नदी के तट  पर गये और कण् व चतुर्वेदमय  सूक्तों में सरस्वती देवी की स्तुति करने लगे एक वर्ष बीत जाने पर वह देवी प्रसन्न हो वहां आयीं। समृद्धि के लिये उन्हें  वरदान दिया । वर के प्रभाव कण्वय के आर्य बुद्धिवाले दस पुत्र हुए जिनका क्रमानुसार नाम था - उपाध्याय, दीक्षित, पाठक, शुक्ल,  मिश्र, अग्निहोत्री, दुबे, तिवारी, पाण्डेय, और चतुर्वेदी । इन लोगों ने नत मस्तक हो सरस्वती देवी को प्रसन्न किया। भक्तवत्सला शारदा देवी ने  अपनी कन्याए प्रदान की। वे क्रमशः- उपाध्यायी, दीक्षिता, पाठकी, शुक्लिका, मिश्र...

सगोत्रीय विवाह वर्जित क्यों B126

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  सगोत्रीय विवाह  वर्जित क्यों ? ————————————————— हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह अपने कुल में नहीं, बल्कि कुल के बाहर होना चाहिए। एक गोत्र में विवाह न हो सके, इसीलिए विवाह से पहले गोत्र पूछने की प्रथा आज भी प्रचलित है।  शास्त्रों में अपने कुल में विवाह करना अधर्म, निंदित और महापाप बताया गया है । इसलिए माता की 5 या पिता की 7 पीढ़ियों को छोड़कर अपनी ही जाति की दूसरे गोत्र की कन्या के साथ विवाह करके शास्त्र पदानुसार संतान पैदा करना चाहिए। क्योंकि सगोत्र में विवाह करने पर पति-पत्नी में रक्त की अति समान जातीयता होने से संतान का उचित विकास नहीं होता। यही कारण है कि अनादि काल से पशु-पक्षियों में कोई विकास नहीं हुआ है, वे ज्यों-के त्यों चले आ रहे हैं। सगोत्र विवाह का निषेध मनु महाराज ने भी किया है असपिण्डा च या मातुरसगोत्रा च या पितुः।  सा प्रशस्ता द्विजातीनां दारकर्मणि मैथुने ॥ अर्थात् जो माता की छह पीढ़ी में न हो तथा पिता के गोत्र में न हो ऐसी कन्या द्विजातियों में विवाह के लिए प्रशस्त है। चिकित्सा-शास्त्रियों द्वारा किए गए अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि सगोत्री...

विक्रमादित्य के नवरत्नB125

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 अकबर के नौरत्नों से इतिहास भर दिया पर महाराजा विक्रमादित्य के नवरत्नों की कोई चर्चा पाठ्यपुस्तकों में नहीं है। जबकि सत्य यह है कि अकबर को महान सिद्ध करने के लिए महाराजा विक्रमादित्य की नकल करके कुछ धूर्तों ने इतिहास में लिख दिया कि अकबर के भी नौ रत्न थे । राजा विक्रमादित्य के नवरत्नों को जानने का प्रयास करते हैं।             राजा विक्रमादित्य के दरबार में मौजूद नवरत्नों में उच्च कोटि के कवि, विद्वान, गायक और गणित के प्रकांड पंडित शामिल थे, जिनकी योग्यता का डंका देश-विदेश में बजता था। चलिए जानते हैं कौन थे। ये हैं नवरत्न – 1–धन्वन्तरि- नवरत्नों में इनका स्थान गिनाया गया है। इनके रचित नौ ग्रंथ पाये जाते हैं। वे सभी आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र से सम्बन्धित हैं। चिकित्सा में ये बड़े सिद्धहस्त थे। आज भी किसी वैद्य की प्रशंसा करनी हो तो उसकी ‘धन्वन्तरि’ से उपमा दी जाती है। 2–क्षपणक- जैसा कि इनके नाम से प्रतीत होता है, ये बौद्ध संन्यासी थे। इससे एक बात यह भी सिद्ध होती है कि प्राचीन काल में मन्त्रित्व आजीविका का साधन नहीं था अपितु जनकल्याण की भावना से मन्त्रिप...

सकारात्मक,प्रसन्न रहें B124

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  *हमारी मिठाइयों पर गौर कीजिए, कुछ ना कुछ संदेश देती है*..... जैसे 1️⃣ *जलेबी* आकार मायने नहीं रखता,  स्वभाव मायने रखता  है,  जीवन मे उलझने कितनी भी हो, *रसीले और मधुर रहो* ॰॰ 2️⃣ *रसगुल्ला* कोई फर्क नहीं पड़ता कि, जीवन आपको कितना निचोड़ता है, *अपना असली रूप सदा बनाये रखें* 3️⃣ *लड्डू* तिल का लड्डू तिल-तिल से व बूंदी का लड्ड़ू-  बूंदी-बूंदी से लड्डू बनता, है। छोटे-छोटे प्रयास से ही सबकुछ होता हैं! *सकारात्मक प्रयास करते रहे.* ॰॰ 4️⃣ *सोहन पापड़ी* हर कोई आपको पसंद नहीं कर सकता, लेकिन बनाने वाले ने कभी हिम्मत नहीं हारी। *अपने लक्ष्य पर टिके रहो* ॰॰ 5️⃣ *काजू कतली* अपने आप को इतना सस्ता ना रखे, की राह चलता कोई भी आपका दाम पूछता रहे ! *आंतरिक गुणवत्ता हमें सबसे अलग बनाती है* 6️⃣ *गुलाब जामुन* सॉफ्ट होना कमजोरी नहीं है! ये आपकी खासियत भी है। *नम्रता यह एक विशेष गुण है* 7️⃣ *बेसन के लड्डू* यदि दबाव में बिखर भी जाय तो, फिरसे बंधकर लड्डु हुआ जा सकता है। *परिवार में एकता बनाए रखें* ॰॰ *आप सभी का हर दिन*,  *इन्हीं मिष्ठान्नों की भाँति*,  *मधुर एवं मंगलमय हो* ......

एकांत में कुछ पल B123

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                              🌹एकांत में बिताकर तो देखे कुछ पल🌹 आप चाहे कितना ही सामाजिकता निभाते हों, एकदूसरे के साथ बातचीत में व्यस्त रहते हों लेकिन आपको अपने लिए कुछ समय की हमेशा जरूरत होती है। अब जबकि सामाजिकता बढ़ाने के लिए अनेक द्वार हमोर आसपास हैं तो अपने लिए एकांत की तलाश बहुत कठिन होती जा रही है। लेकिन एकांत ही आपको अपने कामों के लिए पर्याप्त उर्जा पाने में मदद करता है। वह अपनी खूबियों को पहचानने और अपनी कमजोरियों के साथ आगे बढ़ने में आपकी मदद करता है। अपने एकांत से आप किस तरह आगे बढ़ने की उर्जा ग्रहण करते हैं यह आप पर ही निर्भर करता है लेकिन एकांत में खुद के साथ वार्तालाप के बहुत से फायदे हैं। 1- दूसरों से दूर होने का डर छोड़ दें आज के अति सामाजिक समय में लोग इस बात से डरते हैं कि अगर वे दूसरों को समय नहीं देंगे तो सभी से कट जाएंगे। यही मौजूदा समय की सबसे बड़ी मुश्किल भी है। व्यक्ति दूसरों को तो समय देने के प्रयास में खुद के लिए समय नहीं निकाल पाता है। कई बार व्यक्ति इस बात पर अफसोस करता है कि दूसरे कितनी ...

अपना महत्व कैसे बढ़ाये B122

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  👉 *दूध को दुखी करो तो दही बनता है|*  👉 *दही को सताने से मक्खन बनता है|* 👉 *मक्खन को सताने से घी बनता है|* 👉 *दूध से महंगा दही है,दही से महंगा मक्खन है,और मक्खन से महंगा घी है|* 👉 *किन्तु इन चारों का रंग एक ही है सफेद|* 👉 *इसका अर्थ है बाऱ- बार दुख और संकट आने पर भी जो इंसान अपना रंग नहीं बदलता,समाज में उसका ही मूल्य बढ़ता है|* 👉 *दूध* उपयोगी है किंतु एक ही दिन के लिए, फिर वो *खराब* हो जाता है....!! 👉 *दूध* में एक बूंद *छाछ* डालने से वह *दही* बन जाता है जो केवल दो और दिन *टिकता* है....!! 👉 *दही* का मंथन करने पर *मक्खन* बन जाती है, यह और तीन दिन टिकता है....!! 👉 *मक्खन* को उबालकर *घी* बनता है, *घी* कभी खराब नहीं होता....!! 👉एक ही दिन में बिगड़ने वाले *दूध* में कभी नहीं बिगड़ने वाला *घी* छिपा है....!! 👉इसी तरह आपका *मन* भी अथाह *शक्तियों* से भरा है, उसमें कुछ *सकारात्मक विचार* डालो अपने आपको *मथो* अर्थात *चिंतन* करो....अपने *जीवन* को और *तपाओ* और तब देखना 👉 आप कभी हार नहीं मानने वाले सदाबहार व्यक्ति बन जाओगे....!!। 🌹जय श्री कृष्ण🌹

शीतला माता B121

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   🙏🌹🌹🌺🌺🌹🌹🙏

गुरु शक्ति B120

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                      🌺*गुरू की शक्ति क्या है*🌺 1. गुरू एक तेज है जिनके आते ही सारे सन्शय के अंधकार खतम हो जाते हैं ! 2. गुरू वो मृदंग है जिसके बजते ही अनाहद नाद सुनने शुरू हो जाते हैं ! 3. गुरू वो ज्ञान है जिसके मिलते ही पांचो शरीर एक हो जाते हैं ! 4. गुरू वो दीक्षा है जो सही मायने मे मिलती है तो पार हो जाते हैं ! 5. गुरू वो नदी है, जो निरंतर हमारे प्राण से बहती हैं ! 6. गुरू वो सत चित आनंद हैं, जो हमे हमारी पहचान देता हैं ! 7. गुरू वो बासुरी हैं, जिसके बजते ही अंग अंग थीरक ने लगता हैं ! 8. गुरू वो अमृत हे जिसे पीके कोई कभी प्यासा नही! 9. गुरू वो मृदन्ग हैं, जिसे बजाते ही सो हम नाद की झलक मिलती हैं ! 10. गुरू वो कृपा हि हैं जो सिर्फ कुछ सद शिष्यो को विशेष रूप मे मिलती हे और कुछ पाकर भी समझ नही पाते ! 11. गुरू वो खजाना है, जो अनमोल है ! 12. गुरू वो समाधि है, जो चिरकाल तक रहती है ! 13.गुरू वो प्रसाद है जिसके भाग्य मे हो उसे कभी कुछ मांगने की ज़रूरत नही.        🌺जय श्री कृष्ण🌺   🌺 जय मां सर्वेश्वरी🌺 ...

शिव शक्ति B119

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                 🌺 जय श्री बाबा  कीनाराम भगवान 🌺                🌹🌹शक्ति के बिना शिव 'शव ' हैं । 🌹🌹 अर्थात्–समस्त पुरुष भगवान सदाशिव के अंश और समस्त स्त्रियां भगवती शिवा की अंशभूता हैं, उन्हीं भगवान अर्धनारीश्वर से यह सम्पूर्ण चराचर जगत् व्याप्त है।                     "शक्ति के बिना शिव ‘शव’ हैं।" शिव और शक्ति एक-दूसरे से उसी प्रकार अभिन्न हैं, जिस प्रकार सूर्य और उसका प्रकाश, अग्नि और उसका ताप तथा दूध और उसकी सफेदी। शिव में ‘इ’कार ही शक्ति है। ‘शिव’ से ‘इ’कार निकल जाने पर ‘शव’ ही रह जाता है। शास्त्रों के अनुसार बिना शक्ति की सहायता के शिव का साक्षात्कार नहीं होता। अत: आदिकाल से ही शिव-शक्ति की संयुक्त उपासना होती रही है। "भगवान शिव के अर्धनारीश्वररूप का आध्यात्मिक रहस्य" भगवान शिव का अर्धनारीश्वररूप जगत्पिता और जगन्माता के सम्बन्ध को दर्शाता है। सत्-चित् और आनन्द–ईश्वर के तीन रूप हैं। इनमें सत्स्वरूप उनका मातृस्वरूप है, चित्स्वरूप उनका पितृस्...

जैसी सोच वैसा जन्म B118

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                🚩🙏🙏🌹💖💓💖🌹🌹🙏🙏🚩                         🙏🌹💖 💓 💖🌹🙏 गीता में कहा है कि जो मनुष्य मरते समय जैसी ही चाह करे, वैसा ही वह दूसरा जन्म पा सकता है। _तो यदि एक मनुष्य उसका सारा जीवन पाप करने में ही गंवा दिया हो और मरते समय दूसरे जन्म में महावीर और बुद्ध जैसा बनने की चाह करे, तो क्या वह आदमी दूसरे जन्म में महावीर और बुद्ध जैसा बन सकता है?_ निश्चित ही, मरते क्षण की अंतिम चाह दूसरे जीवन की प्रथम घटना बन जाती है। जो इस जीवन में अंतिम है, वह दूसरे जीवन में प्रथम बन जाता है। इसे ऐसा समझें। रात आप जब सोते हैं, तो जो रात सोते समय आपका आखिरी विचार होता है, वह सुबह जागते समय आपका पहला विचार बन जाता है। इसे आप प्रयोग करके जान सकते हैं। रात आखिरी विचार, जब आपकी नींद उतर रही हो, जो आपके चित्त पर हो, उसे खयाल कर लें। तो सुबह आपको जैसे ही पता लगेगा कि मैं जाग गया हूं वही विचार पहला विचार होगा। मृत्यु महानिद्रा है, बड़ी नींद है। इसी शरीर में नहीं जागते हैं, फिर दूसरे शरीर में जागते ह...

श्रम करें B117

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                        🌼🌿  औघड़ वाणी  🌿🌼 🔱🚩"आश्रम" का अर्थ ही है कि आ कर हम लोग श्रम करें |       इस श्रम का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है | जो यहाँ आकर हम सीखते हैं , करते हैं , वही कार्य हम अपने छोटे से घरों में करें तो हमें भौतिक रूप से संतुष्टि मिलती है , उन्नति होती है और हम अपने परिवार को चलाने में,अपने कुनबे को चलाने में सक्षम होते हैं | 🌹 श्रम करने से यदि हम भागते रहेंगे,बचते रहेंगे तो हम कुछ भी प्राप्त नहीं कर पाएंगे | लेकिन यहाँ आश्रम में आ कर,उन संत-महात्माओं के यहाँ जाकर , हम लोग यही सीख लेना चाहते हैं कि हम उस मानवता को प्राप्त करें |  🌷 हमारे जो भी कार्य हों , जितने भी कर्म हैं वह अपनी आत्मा से आत्मा के लिए हों न कि हमारा दृष्टिकोण केवल भौतिक उन्नति,आर्थिक उन्नति और ऐश आराम के लिए हो |🌷 🌼हमारे प्राचीन काल में और अभी भी कई संत-महात्मा हैं जिनके पास कुछ भी नहीं है,एक पेड़ के नीचे भी बैठे हैं,तो भी उनमे कितनी संतुष्टि है , कितनी शांति है,कितना आकर्षण है कि बहुत बड़े-बड़े लोग भी...