SUNDERKAND B148


सुंदरकांड में श्री तुलसीदास जी ने प्रभु श्रीराम के परमभक्त श्री हनुमान जी की लीलाओं का अतिसुन्दर वर्णन किया है। इस कारण रामायण (रामचरित मानस) में तुलसीदास जी ने इसे "सुंदरकांड" का नाम दिया है ।

"सुंदरकांड" के पाठ से श्री महावीर हनुमानजी अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं एवं मनोवांछित फल , आत्मा की शांति , घर में सुख-समृद्धि , सफलता की प्राप्ति कराते है ।

तुलसीदास को संस्कृत के आदिकवि महर्षि वाल्मीकि का रूप अवतार माना गया है। "रामचरितमानस" का कथानक महर्षि वाल्मीकि जी की रचना "रामायण" से ही लिया गया है ऐसा बताया जाता है ।

"रामचरितमानस" का ७ कांडों (अध्यायों ) में वर्णन किया गया है । "सुंदरकांड" रामचरितमानस का एक सबसे महत्वपूर्ण कांड है । सुंदरकांड में श्री हनुमान जी ने अपने प्रकांड साहस , महावीर बल , प्रकांड बुद्धिमता से सीता माता को खोज निकाला था । इस कारण यह कांड हनुमानजी की सफलता एवं सुंदरकांड के पाठ करने से भक्तों को सत्कार्य करते हुए जीवन में सफलता प्राप्त होती है । 🚩सुंदरकांड विजयी भवः🚩 का प्रतीक है।

"रामचरितमानस" के ७ कांड क्रमशः इस प्रकार है :-

१- बालकांड , २- अयोध्याकांड , ३- अरण्यकांड , ४- किष्किंधाकांड , ५- सुंदरकांड , ६- लंकाकांड , ७- उत्तरकांड ।

श्री तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया "रामचरितमानस" हिंदू धर्म का सबसे प्रमुख ग्रंथ है ।

🚩🌷जय श्री राम , जय श्री कृष्ण🌷🚩

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