साधु और शैतान B86

 


  
                           जय श्री बाबा कीनाराम 

              🚩🌹"सत्य घटना पर आधारित"🌹🚩

  एक दिन एक युवक मेरे पास नौकरी की याचना के साथ आया और निवेदन किया कि बाबा मैं पढ़-लिख कर कई वर्षो से बेकार बैठा हूँ, कोई नौकरी नहीं मिल रही। चपरासी की भी नौकरी मिल जाती तो "हिल्ले रोजी, बहाने मौत" अपना गुजारा कर लेता। मैंने अन्यमनस्क भाव से कहा कि किसी बड़े व्यक्ति से मिले तो वह उसकी मदद करेगा।

   वह युवक प्रणाम कर राज-दरबार कि दिशा में चला गया। उसने राज दरबार में बैठे वरिष्ठ लोगो पर दृष्टि डाली तो कोई उसे बाघ, कोई लोमड़ी, कोई गदहा, कोई बिल्ली, कोई भालू की तरह दिखने लगा। मेरे पास से जाने के बाद उसे कोई मनुष्य दिखाई ही नहीं दे रहा था। वह भागते-भागते मेरे पास आया और सारा बात बता कर बोला कि बाबा ऐसा कैसे हो गया, मुझे दृष्टि भ्रम कैसे हो रहा है।

  मैंने पास से एक लकड़ी तोड़कर उसके कान पर रख दी और कहा, जाओ देखो इस बार कोई मनुष्य दिखाई देगा तो नौकरी की प्रार्थना कर लेना उस इंसान से। वो पूरे शहर में घूमता रहा पर उसे मनुष्य की शकल में कोई दिखाई ही नहीं दे रहा था, तभी उसका ध्यान एक मोची पर गया जो कि जूता सील रहा था, वो ही सिर्फ इसे मनुष्य की शकल में दिखाई दिया, जब उस युवक ने उस मोची से निवेदन किया कि मुझे नौकरी दिलवा दीजिये तो वो मोची बड़ा खुश हुआ और बोला कि उपकार हमारा धर्म है। मैं आज ही एक नए जूते राजा साहेब के लिए बना रहा हूँ और कल इसे राजा साहेब को देकर पारिश्रमिक में आपकी नौकरी लगवा दूंगा। और अगले दिन ऐसा ही हुआ.... राजा ने उस युवक को अपने यहाँ चपरासी की नौकरी दे दी।

     न जाने इतने मनुष्यों की शकल में कौन-कौन से जानवर घूम रहे हैं। शैतान भी इंसान कि शकल में ही घूमता है। अपना हाथ उन्ही के हाथ में दो जो इंसान हो। इंसान वही है जो अनुशासित है, परिश्रमी है, और मित्र के दुःख में दुखी होता है। परिश्रम कर जीवन यापन करने वाला ही इंसान है।


🚩🌹परम् पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी🌹🚩

                  ।।🌹जय श्री कृष्ण🌹।।

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