गुरु एवं संध्या आरती का महत्व B75


                           🔱  औघड़ वाणी  🚩

संध्या को चिराग जलाने तथा धूप और आरती करने का महत्व !

" अब संध्या का समय हो गया है। सब लोग अंधकार को छोड़कर प्रकाश की ओर बढ़ने के लिए चिराग जलायेंगे और आरत होकर आरतियाँ भी करेंगे। परमात्मा से यह प्रार्थना करेंगे कि हे परमात्मा! ------  हमारे हृदय में छाये अंधकार को दूर करने के लिए ऐसा दीपक जलाओ जिससे अपने अंधकार को दूरकर दूसरों को भी अच्छे विचारों, गुणों, चरित्र तथा व्यवहारों और सद्कार्यों से मैं प्रकाशित कर सकूँ। इसलिये संध्या को यह दीपक जलाया जाता है। आरती, धूप, दीप, नैवेद्य से हमें यही प्रेरणा मिलती है। संध्या के समय पूजा-प्रार्थना इसीलिये की जाती है कि हमारी रात्रि बुरी आत्माओं को छोड़कर अच्छी आत्माओं का सानिध्य प्राप्त करें और अच्छी आत्मायें हमारे पुत्र-पौत्र, पिता-पितामह तक का मुझे स्मरण दिलायें और उन लोगों का भी यदि कहीं बुरी आत्माओं से संग हो तो वह आत्मायें छोड़कर भागें। "

                                   .....अघोर वचन शास्त्र पृ.क्र.-93

                                           🌹।।जय श्री कृष्ण।।🌹

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