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Interview with Prem B231
25 December 2025 को ❤️ दिल की बात में आ रहे हैं- प्रेमसिंह फर्स्वाण नाम ही काफी है सरल, सौम्य, शांत, सबकी सहायता करने वाले आज सीनियर कैमरामैन ए बी पी न्यूज़ लखनऊ में कार्यरत ३० वर्षों के अनुभव के साथ बाढ़, आपदा किसी बड़ी घटना को अपने कैमरे में कैद करने के लिए अपने कंधे पर कैमरा रखकर तेज बारिश, कड़क तपती धूप, कड़ाके की ठंड कभी-कभी गोलियों के बीच, दंगों के बीच, जंगल में जानवरों के बीच अपने जुनून के साथ खड़े रहकर अपने दर्शकों तक सभी तरिके के सजीव चित्रण को पहुँचा रहे हैं । उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव- सरतोली, जिला-चमोली, से आए इस नवयुवक ने अपनी एक नई दूनिया बनाई । एक कैमरामैन की दुनिया लेन्स के पीछे की होती है, जहाँ वे पूरी दुनिया को खबर दिखाते है पर खुद कभी सामने नहीं आते। आज मैं आप को ABP न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित चैनल में काम करने वाले सीनियर कैमरामैन श्री प्रेम सिंह फर्स्वाण से मिलवायेंगे और उनके अनुभव से रूबरू होंगे जिसमें वे अपने ❤️ दिल की बात आप से करते नज़र आएंगे । (२५ दिसंबर २०२५) My Youtube link :- https://youtube.com/@prashantjksharma?si=X58D6nfXaNuz1pLb -प्रशांत जे.के.श...
महामृत्युंजय मंत्र की रचना B232
महामृत्युंजय मंत्र की रचना कैसे हुई किसने की महामृत्युंजय मंत्र की रचना और जाने इसकी शक्ति; शिवजी के अनन्य भक्त मृकण्ड ऋषि संतानहीन होने के कारण दुखी थे। विधाता ने उन्हें संतान योग नहीं दिया था। मृकण्ड ने सोचा कि महादेव संसार के सारे विधान बदल सकते हैं। इस कारण क्यों न भोलेनाथ को प्रसन्नकर यह विधान बदलवाया जाए। मृकण्ड ने घोर तप किया। भोलेनाथ मृकण्ड के तप का कारण जानते थे इसलिए उन्होंने शीघ्र दर्शन न दिया लेकिन भक्त की भक्ति के आगे भोले झुक ही जाते हैं। महादेव प्रसन्न हुए। उन्होंने ऋषि को कहा कि मैं विधान को बदलकर तुम्हें पुत्र का वरदान दे रहा हूं लेकिन इस वरदान के साथ हर्ष के साथ विषाद भी होगा। भोलेनाथ के वरदान से मृकण्ड को पुत्र हुआ जिसका नाम मार्कण्डेय पड़ा।ज्योतिषियों ने मृकण्ड को बताया कि यह विलक्ष्ण बालक अल्पायु है। इसकी आयु केवल 12 वर्ष है। ऋषि का हर्ष विषाद में बदल गया। मृकण्ड ने अपनी पत्नी को आश्वस्त किया-जिस ईश्वर की कृपा से संतान हुई है, वही भोले इसकी रक्षा करेंगे।भाग्य को बदल देना उनके लिए सरल कार्य है। मार्कण्डेय बड़े होने लगे तो पिता ने उन्हें शिवमंत्र की दीक्षा दी। मार्कण...


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